हरेश कुमार
आपातकाल गलत था,लेकिन उसके विरोध के नाम पर जितने नेता पैदा हुए, उन्होंने क्या किया?परिवारवाद और भ्रष्टाचार के विरोध में आए ऐसे लोगों ने सबसे अधिक भाईभतीजावाद और भ्रष्टाचार फैलाया है।
इंदिरा ने तो अपनी गलती को छुपाने के लिए एक गलती की,लेकिन दूसरे लोग तो इंदिरा के भी बाप निकले। आज किसी भी पार्टी के नेता का आचरण देखिए, मैं दावे के साथ कहता हूँ कि आपको राजनीति से घृणा हो जाएगी। जिसके पास कभी साइकिल खरीदने की औकात नहीं थी, सब हजारोंहजार करोड़ के मालिक बने बैठे है।
भारत के बाद आजाद होनेवाला चीन,सिंगापुर कहां से कहां पहुंच गया। यहां एकाध अपवाद को छोड दें तो किसी भी नेता को सजा नहीं मिलती। हत्या, अपहरण, बलात्कार,तस्करी में शामिल लोग दो नंबर के पैसे के बूते लोकसभा और राज्यसभा में पहुंच जाते हैं।
सरकारी स्कूलों-कॉलेजों,अस्पतालों की हालत दिन-प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है और दो नंबर के पैसों से गली-गली कुकुरमुत्तों की तरह प्राइवेट स्कूल-कॉलेज, अस्पताल व अन्य संस्थान फूल-फल रहे हैं। इन सबको नेताओं का खुला संरक्षण प्राप्त है। नेतागीरी आज की तारीख में दलाली का धंधा बन चुका है। अपनी पसंद के उद्योगपतियों को संरक्षण देना और बदले में चुनाव के समय उनसे लाभ लेना भारत की राजनीति का वह बदनुमा दाग है,जो कभी मिटाये नहीं मिटनेवाला है।
कोई भी पार्टी नेता-अधिकारी, ठेकेदार और दलालों के नेटवर्क को तोड़ने को राजी नहीं है। यही कारण है कि सामान्य आदमी अब नेता बनने की सोच भी नहीं सकता,जब तक कि वो दलाली न करे। एकाध अपवाद को छोड़कर।
दुख और हैरानी तब होती है कि चतुर्थ श्रेणी के चपरासी के लिए योग्यता का निर्धारण करनेवाले देश में नेतागीरी के लिए कोई योग्यता की जरूरत नहीं। मन घृणा से भर जाता है। किसी की मृत्यु चिकित्सक के न देखने या चिकित्सा सुविधा न मिलने से हो जाती है तो किसी के लिए पूरी की पूरी व्यवस्था दंडवत होती है।
चाइनीज़ वायरस कोरोना संक्रमण काल में हम सबने इस स्थिति को बहुत नजदीक से देखा और महसूस किया है। इसके बावजूद सत्तारूढ़ दल को शर्म नहीं आती। इसमें सभी दलों के लोग शामिल हैं।
भ्रष्टाचार और भाईभतीजावाद इस देश को दीमक की तरह खोखला कर रहा है, लेकिन कोई भी इसे जड़ से उखाड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाता,सारे विकलांग हो चुके हैं।
अपराधियों और नेताओं के गठजोड़ पर एन एन वोहरा कमेटी की रिपोर्ट देश के सामने रखने में सबकी नानी मर जाती है।चुनाव के समय नेशनल करप्ट पार्टी (एनसीपी) के मुखिया शरद पवार को संसद में सर्वश्रेष्ठ सांसद और पद्म विभूषण पुरस्कार दिया जाता है।
महाराष्ट्र में इसी शरद पवार के भतीजे अजीत पवार पर 72हजार करोड़ सिंचाई घोटाले का आरोप लगाने वाली पार्टी उसे उपमुख्यमंत्री बनाकर सभी दागों से बरी कर देता है। सच कहूं तो इस देश में राजनीति का मुख्य मकसद सत्ता हासिल करना रह गया है। यहां सभी का चाल-चरित्र और चेहरा एक-सा है।
वोट के लिए रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुसलमानों को हर तरह की सुविधाएं मुहैया करानेवाले इस देश के नेताओं का कोई स्तर ही नहीं है।
हो भी क्यों नहीं? जिस देश की आजादी के लिए लाखों लोगों ने अपने प्राणों की कुर्बानी दी। उन्हें इसका श्रेय न देकर नेहरू और गांधी को सारा श्रेय दे दिया। बेहयाई की हद होती है। छद्म सेक्युलरिज्म और मुस्लिम व ईसाई तुष्टिकरण की नीतियों के बलबूते 70साल तक देश पर राज करनेवाली कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा वाली पार्टियों ने वो जहर बोया कि आनेवाली पीढ़ी अपने वास्तविक नायकों को जान ही नहीं पाई।
हिंदू जनजागरण के पुरोधा स्वामी श्रद्धानंद के हत्यारे अब्दुल रसीद को अपना भाई कहकर बचानेवाले गांधी को राष्ट्रपिता बनाकर नेहरू और उसके खानदान ने देश के सभी संसाधनों पर कब्जा कर लिया। लाला लाजपतराय, भगत सिंह चंद्रशेखर, सुभाषचंद्र बोस, अशफाकउल्ला खान ,खुदीराम बोस के त्याग और बलिदानों को हम भुला बैठे। महाराणा प्रताप, बाबू वीर कुंअर सिंह,शिवाजी महाराज, रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी को या तो गायब कर दिया गया या कांट-छांटकर पढ़ाया जाता रहा। भारत के इतिहास को आक्रमणकारियों का इतिहास बना दिया। वामियों ने उनकी चरणवंदना में भांटों को भी पीछे छोड़ दिया। राजा-महाराजाओं के शासनकाल में भांट हुआ करते थे, जो राजा की वंदना करके अपना जीवनयापन किया करते थे, वामपंथी भांटों से भी बड़े निकले और इन्होंने सत्तारूढ़ दल कांग्रेस की नीतियों को आगे बढ़ाने व सत्तारूढ़ करने में बहुत मदद की।
लाखों-करोड़ों हिंदुओं के हत्यारे मुगलों को भारत की संस्कृति का रक्षक बताया जाने लगा। जिन हमलावरों की वजह से देश की सभ्यता और संस्कृति का नाश हो गया। लाखों महिलाएं अपने इज्ज़त की रक्षा करने के लिए जौहर करने को मजबूर हो गईं। साठ हजार से अधिक बड़े-छोटे मंदिरों को इन आक्रमणकारियों ने या तो जमींदोज कर दिया या उनकी जगह मस्जिद बना दी, उसे वामियों ने देश का तारणहार बना डाला। कांग्रेस की सहायता से इन वामियों ने देश की सभ्यता और संस्कृति का जितना बलात्कार किया उतना दर्द तो आततायी आक्रमणकारियों ने भी नहीं दिया था। ये वामपंथी देश के सभी संस्थाओं में आज भी कार्यरत हैं और अपने एजेंडे पर चल रहे हैं। जरूरत है इनसे छुटकारा पाने और देश के इतिहास का पुनर्लेखन करने की।

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