हरेश कुमार
चाइनीज़ वायरस कोरोना की दूसरी लहर को समझने में केंद्र सरकार पूरी तरह से नाकाम रही, जिसका खामियाजा देश के लोगों को भुगतना पड़ा है। सरकार सतर्क होती तो उन अभागे हजारों लोगों को बचाया जा सकता था, जो असमय काल-कवलित हो गए। यही सरकार है जब पिछले साल बिना किसी अनुभव के हर मोर्चे पर डटी थी और भारत विश्वविजेता बनकर ऊभरा था। ऐसा नहीं है कि तब जानमाल की हानि नहीं हुई थी, हुई थी,लेकिन तब सब अंधेरे में तीर मार रहे थे। किसी के पास इस चाइनीज़ वायरस के पुख्ता इलाज की जानकारी नहीं थी, तब भी भारतीय चिकित्सकोंं ने आगे बढ़कर संक्रमण के आधार पर बीमारी का इलाज किया और कई लोगों को बचाने में कामयाब रही।
दूसरी लहर की चेतावनी को भारत सरकार और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। पहली लहर में जो व्यवस्था बनी थी, उसे भी हटा दिया गया था, जिसको बहाल करने में आफी समय लगा,तब तक हजारों लोग ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ चुके थे। पहली लहर में राधास्वामी सत्संग में बना दस हजार बेड के अस्पताल को खत्म कर दिया गया था। कई लोग तो बेड न मिलने के कारण चल बसे।
केंद्र सरकार और उसका पूरा अमला पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में व्यस्त था। पूरी मीडिया का फोकस पश्चिम बंगाल में था। इसी बीच चाइनीज वायरस कोरोना की दूसरी लहर ने चुपके से संक्रमण कै देशभर में फैला दिया।
इन सबके बीच एक तबका जिसे बस मोदी विरोध के लिए मटेरियल की जरूरत थी उसने आगे बढ़कर लोगों में भ्रम फैलाना शुरू कर दिया। इस तबके ने वैक्सीन को लेकर आमजनों में जबरदस्त भ्रम फैलाया, जिससे लाखों की संख्या में टीके सही तापमान में स्टोर न करने की वजह से खराब हो गए। जहां कहीं भी विपक्षी पार्टियों के नेताओं और दलों का प्रभाव था,सबने सोशल मीडिया से लेकर हर मोर्चे पर झूठ फैलाया। नतीजा जो लोग टीका लेना चाहते थे,तब आसानी से मिल रहा था, वे उदासीन हो गये और टीका नहीं लिया।
इनमें से कुछ बुद्धिजीवी तो ऐसे थे जिन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) का नाम लेकर चाइनीज़ वायरस के भारतीय संस्करण के घातक होने की बात मीडिया में जमकर परोसी,जबकि यही लोग इसकी मूल उत्पत्ति चीन के औद्योगिक शहर वुहान की लाइब्रेरी से इस जैविक हथियार के दुनियाभर में फैलने पर मुंह में दही जमाये बैठे थे। चीन ने पैसे और ताकत के बल पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के निदेशक को अपने पक्ष में कर रखा है। इसने दुनियाभर की मीडिया को भी सही सूचना से वंचित कर रखा है। वहीं, भारत की मीडिया को तो बस पैसे से मतलब है वो तो आतंकवादी संठन आईएसआई के आतंकियों को भी पैसे मिलने पर एक्टिविस्ट बताने और लिखने को तैयार बैठा है। यह दुनियाभर में अकेला ऐसा देश है, जिसका विपक्ष किसी भी निम्न स्तर तक गिर सकता है। बस उसकी राजनीतिक महात्वाकांक्षा की पूर्ति होनी चाहिए।
यह सही है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी से अक्षम्य अपराध हुआ है। वे चाइनीज वायरस की दूसरी लहर को समझने में पूरी तरह से नाकाम रहे हैं। विपक्ष के नेताओं और पार्टियों से यह उम्मीद करना कि वो सकारात्मक सोच रखेंगे, निहायत ही बेवकूफी है। ब्रांड मोदी को बहुत धक्का लगा है। इसकी भरपाई में काफी समय लगेगा।
केंद्र सरकार को प्रशासनिक अधिकारियों को तीन से चार हिस्सों में जिम्मेदारी बांट देनी चाहिए। एक का फोकस सिर्फ और सिर्फ चुनाव पर हो तो दूसरे का फोकस चाइनीज वायरस जैसी संक्रामक बीमारियों को रोकने और बेहतर इलाज पर हो। इनको पूरा पावर दीजिए। इनके कार्यों में किसी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। तीसरे को देश की शिक्षा और चिकित्सा जैसे मूलभूत सुविधाओं के बेहतर विकास और सबको सुलभ हो, ऐसी रणनीति बनाने पर जोर देना चाहिए। वहीं, चौथा देश में विकास के अन्य मामलों को देखे,जिसमें रक्षा से लेकर सड़क, बिजली और अन्य परियोजनाओं की देखरेख व नई योजनाओं को समय सीमा के अंदर पूरा करने की जिम्मेदारी हो।
Narendra Modi PMO India Ministry of Home Affairs, Government of India Bharatiya Janata Party (BJP)

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