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बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

दिल्ली पुलिस पर तलवारों से हमला करने वालों को बचाने वाले कभी भी किसान और उनके हितैषी नहीं हो सकते

 हरेश कुमार



दिल्ली पुलिस के जवानों पर तलवार से हमला करने वाले तथाकथित किसानों पर चुप्पी साधने वाले, सुरक्षा के लिए स्टील रॉड की फोटो देखकर हंगामा खड़ा करने लगे। दिल्ली पुलिस के जवान भी इसी देश के हैं और उनमें से कितने जवानों के माता-पिता किसान हैं। खेतों में हार्डतोड़ मेहनत करते रहे हैं।



केंद्र सरकार द्वारा कृषि को लेकर नये कानून पारित करने के बाद से ही बिचौलिए और आढ़ती बिलबिला गये हैं। कांग्रेस-वामपंथी और कठमुल्लों को तो बस विरोध का एक बहाना चाहिए और उन्हें मिल गया है। इस आंदोलन से जुड़े लोग और इसे फंडिंग करनेवाले लोगों को पहचानिए, सारी हकीकत सामने आ जाएगी।

कनाडा के प्रधानमंत्री का इस आंदोलन से क्या मतलब। खालिस्तानी कनाडा में एक बड़ी ताकत बन चुके हैं। कनाडा शुरू से ही खालिस्तानियों का समर्थक रहा है। ब्रिटेन भी समर्थक रहा है। हालांकि, भारत सरकार के कड़े रूख के कारण अब वह गाहेबगाहे बयान जारी कर लीपापोती करता रहता है। ये दोनों देश और इनकी मीडिया हमेशा से प्रो-पाकिस्तानी रहे हैं।



नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ आंदोलन करनेवाले एक खास विचारधारा और समुदाय के लोग कृषि कानून का विरोध कर रहे हैं। इनके विरोध का मुख्य मुद्दा सिर्फ और सिर्फ मौजूदा सरकार का अंधविरोध करना है। मोदी-शाह और योगी की तिकड़ी ने आजादी के बाद से ही जारी छद्मसेक्युलरिज्म और मुस्लिम व ईसाई मिशनरियों की तुष्टिकरण की नीतियों पर कड़ा प्रहार जो किया है। इन सबकी बिलबिलाहट स्वाभाविक है। सरकार के विरोध में जो खड़ा हो कांगी-वामी, तथाकथित परगतिशील शुतुरमुर्गी समाजवादी बुद्धिजीवी व नेता और कठमुल्ले उनके साथ में होते हैं। इन सबको पहचानने के लिए खास मेहनत की जरूरत नहीं होती।



ये नहीं जानते हैं कि जितना अंधविरोध करेंगे देश के लोग उससे कई गुना ताकत से सरकार के पक्ष में खड़े होंगे और यही हो रहा है। हालांकि, इन सबको छिटपुट सफलता मिलती रही है।

बिहार को बर्बाद करने वाले लालू प्रसाद यादव एंड फैमिली, उत्तर प्रदेश में मौलाना मुलायम एंड टोंटी चोर पुतर पार्टी, पश्चिम बंगाल में मोमता बानो, असदुद्दीन ओवैसी से लेकर महाराष्ट्र में शिवसेना भी अब इन्हें रास आने लगा है,क्योंकि वो मोदी और भाजपा के विरोध में खड़ी है।

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