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बुधवार, 10 फ़रवरी 2021

सिखों को पाकिस्तान बर्बाद करने पर तुला है, लेकिन खालिस्तान के चक्कर में इन सबकी आंखों पर पट्टी बंध चुकी है

हरेश कुमार



पैसे की हवस के कारण आज पूरा पंजाब ने नशे का शिकार हो गया। पाकिस्तानियों ने पूरे पंजाब को नशेड़ी बना दिया। इसके पीछे के गणित को समझना जरूरी है। सिख पंत की स्थापना मुस्लिम आक्रमणकारियों से सनातन धर्म की रक्षा के लिए की गई थी। गुरु नानक से लेकर गुरु अर्जुन देव, गुरु तेगबहादुर और गुरु गोविंद सिंह ने मुस्लिमों के तमाम अत्याचारों का विरोध किया,लेकिन किसी ने मुस्लिम धर्म को नहीं अपनाया। सिखों को पाकिस्तान बर्बाद करने पर तुला है, लेकिन खालिस्तान के चक्कर में इन सबकी आंखों पर पट्टी बंध चुकी है

मुगलों के पतन के बाद इस देश पर अंग्रेजों का शासन हुआ सिखों ने उनके अत्याचारों का भी डटकर प्रतिकार किया।
देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान ने भारत से कई युद्ध लड़ा। जब यह साबित हो गया कि वह आमने-सामने की लड़ाई में भारत से कभी जीत नहीं सकता तो उसने छद्म युद्ध शुरू कर दिया। उसके निशाने पर सिख रहे। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में सिखों की अच्छी-खासी संख्या थी। वे धर्म के प्रति हमेशा से निष्ठावान रहे, पाकिस्तानी हुक्मरानों ने इस पंथ को तोड़ने के लिए कई प्रकार से वॉर शुरू कर दिया। सिखों को अलग देश के लिए भड़काने से लेकर उनमें नशाखोरी की प्रवृत्ति पैदा कर दी। आज के हालात ये हैं कि पंजाब का हर गांव नशे की लत में आ चुका है। पैा कमाने की होड़ के कारण वहां के किसानों ने खेतों में रासायनिक खादों का अत्यधिक प्रयोग किया। आज इसका परिणाम ये है कि कई गांव में हर घर में कैंसर रोगी बन चुके हैं। एक पूरा ट्रेन का नाम कैंसर एक्सप्रेस रख दिया गया है, क्योंकि उसमें अधिकतर मरीज कैंसर के रोगी होते हैं।
नशे की लत, अधिक से अधिक पैसा कमाने की हवश के कारण आज सिख पथ के लोग अपने ही गुरुओं की दी हुई शिक्षा को भूल गए हैं। वो आज उन लोगों के साथ खड़े हैं, जिसका असली मकसद इस पंथ को खत्म करना है और वो अपने मकसद में काफी हद तक कामयाब हो चुके हैं। गुरु गोविंद सिंह के बच्चों को जिंदा दीवार में चुनवाने वालों के साथ आज सिख खड़े नजर आते हैं, इसके पीछे किसी भी तरह से अधिक से अधिक पैस कमाने की हवस है। इन सबके लिए पाकिस्तान, कनाडा, ब्रिटेन, मलेशिया आदि देशों से हवाला के जरिए पैसे आते हैं। कनाडा तो खालिस्तानियों का गढ़ बन चुका है, जो भारत विरोधी गतिविधियों को हवा देने में लगा रहता है।



नशे और पैसे की हवस के कारण सिख पंथ के युवा अपने ही गुरुओं की दी हुई शिक्षा को भूल चुके हैं। दूसरी तरफ, पाकिस्तान अपने मकसद में पूरी तरह से कामयाब होता दिख रहा है। खालिस्तान आंदोलन को हवा देने वाले पाकिस्तान और अफगानिस्तान में सिखों के साथ हो रहे अत्याचार पर मुंह नहीं खोल पाते हैं। यही कारण है कि ननकाना साहिब से लेकर करतारपुर में सिखों के साथ हमेशा दोहरा और अमानवीय व्यवहार होता रहता है। वहीं, खालिस्तानी पाकिस्तानियों के साथ मिलकर हिन्दुस्तान के खिलाफ नौजवानों को भड़काने में लगे होते हैं। इन सबकी आंखों पर पट्टी बंध चुकी है।
कश्मीर में उतना बड़ा नरसंहार हो गया। अफगानिस्तान में ये पूरी तरह से खत्म हो गए। पाकिस्तान में महज कुछ हजार बचे गए हैं इसके बावजूद सिख पंथ के लोग पाकिस्तान और वहां के सत्ता पर बैठे हुक्मरानों के साथ-साथ वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई के असली चेहरे को पहचान नहीं पा रहे हैं।
एक समय था, जब खेल से लेकर हर जगह पंजाबियों का दबदबा रहता करता था, लेकिन नशे की लत के कारण यह सब खत्म होने लगा है।


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