हरेश कुमार
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत से सरकार बनने के बाद से ही विरोधियों का एक तबका ऐसा है, जो विरोध के नाम पर तमाम सीमाओं को लांघने के लिए तैयार रहता है। पांच जनवरी 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब के फिरोजपुर में एक रैली थी। इसके लिए वो बठिंडा एयरपोर्ट पहुंचे। वहां मौसम खराब होने की वजह से सड़क मार्ग से जाने का निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री का काफिला जैसे ही फिरोजपुर-मोगा हाईवे पर पहुंचा, वहां पर पहले से लोग जमा थे। ऐसा पहली बार हुआ है कि प्रधानमंत्री की यात्रा में इस तरह की रुकावट आई हो। प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिहाज से यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी थी कि वो सड़क रास्ते को खाली रखता, लेकिन यहां जो कुछ हुआ, वह अत्यंत निंदनीय था। एक तरह से यह सब जानबूझकर या लापरवाही की वजह से किया गया।
प्रधानमंत्री का काफिला फ्लाईओवर पर 15-20 मिनट तक रुका रहा, लेकिन जब लगा कि आगे का रास्ता सेफ नहीं है तो उन्होंने बठिंडा एयरपोर्ट वापस जाने का निर्णय लिया और रैली को रद्द कर दिया। रैली रद्द होने के बाद जब नरेंद्र मोदी बठिंडा एयरपोर्ट वापस पहुंचे तो उन्होंने पंजाब की कांग्रेस सरकार पर तंज कसा। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मोदी ने एयरपोर्ट के अधिकारियों से कहा- अपने मुख्यमंत्री को मेरा शुक्रिया कहना कि मैं बठिंडा एयरपोर्ट तक जिंदा पहुंच सका।
प्रधानमंत्री इस रैली के माध्यम से पंजाब को एक बड़ी सौगात देने की घोषणा करने जा रहे थे। सुरक्षा कारणों से रैली रद्द होने के बाद से पक्ष-विपक्ष के नेतओं की प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई थी। जैसा कि सबको पहले से ही मालूम है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों ने मोदी की रैली के रद्द होने का कारण अपने हिसाब से बताया तो वहीं इन सबने प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जाने-अनजाने अवहेलना की है और वो भी तब जब देश इससे पहले दो प्रधानमंत्री- इंदिरा गांधी और राजीव गांधी और एक मुख्यमंत्री - बेअंत सिंह (पंजाब) को आतंकी हमलों में खो चुका है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, पंजाब के हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक से करीब 30 किलोमीटर दूर जब प्रधानमंत्री का काफिला फ्लाईओवर पर पहुंचा तो पाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क को अवरुद्ध कर दिया था। करीब 15-20 मिनट तक प्रधानमंत्री फ्लाईओवर पर फंसे रहे।
केंद्रीय गृह मंत्रालय का कहना है कि पंजाब की सरकार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कार्यक्रम के बारे में पहले ही पूरी जानकारी दे दी गई थी। इसके बाद भी प्रदेश की सरकार की ओर से सुरक्षा की कोई तैयारी नहीं की गई।
बता दें कि देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए अलग से स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) की व्यवस्था की गई है।
प्रधानमंत्री के काफिले में सबसे पहले दिल्ली पुलिस सिक्योरिटी स्टाफ की गाड़ी सायरन बजाती हुई चलती है। इसके बाद एसपीजी की गाड़ी और फिर दो गाड़ियां चलती हैं। इसके बाद दाईं और बाईं तरफ से दो गाड़ियां रहती हैं जो बीच में चलने वाली प्रधानमंत्री की गाड़ी को सुरक्षा प्रदान करती है। पीएम मोदी की सुरक्षा में विशेष सुरक्षा दल (एसपीजी) के जवान तैनात रहते हैं। उनकी सुरक्षा में विभिन्न घेरों के तहत एक हजार से ज्यादा कमांडो तैनात रहते हैं।
पीएम के चारों तरफ रहते हैं एसपीजी कमांडो
सार्वजनिक कार्यक्रम में एसपीजी कमांडो पीएम के चारों तरफ रहते हैं और उनके साथ-साथ चलते हैं। किसी भी कमांडो को पीएम की सुरक्षा में तैनात करने से पहले उसके बारे में गहन छानबीन की जाती है। प्रधानमंत्री के निजी सुरक्षा गार्ड सुरक्षा घेरे की दूसरी पंक्ति में तैनात रहते हैं। यह भी एसपीजी के बराबर प्रशिक्षित और दक्ष होते हैं, जो किसी भी अनहोनी को रोकने में सक्षम होते हैं। तीसरे सुरक्षा चक्र में नेशनल सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) होते हैं।
चौथे चक्र में अर्द्धसुरक्षा बल के जवान और विभिन्न राज्यों के पुलिस अधिकारी होते हैं। जब पीएम किसी राज्य में जाते हैं तो यह प्रदेश पुलिस की जिम्मेदारी होती है कि वह बाहरी सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही किसी भी अनहोनी को रोके। सुरक्षा के पांचवें चक्र में कमांडो और पुलिस कवर के साथ कुछ अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस वाहन और एयरक्राफ्ट रहते हैं। यह सभी वाहन उच्च क्षमता के सैन्य आयुधों (आर्म्स एम्युनिशन) से लैस होते हैं।
पीएम के काफिले में चलती हैं दो डमी कार
यदि पीएम के काफिले पर जमीनी या हवाई हमला होता है तो इनके जरिए उससे आसानी से निपटा जा सकता है। यह किसी भी तरह के रासायनिक या जैविक हमले का जवाब देने में सक्षम होते हैं। मोदी अति सुरक्षा वाली बुलेटप्रुफ बीएमडब्ल्यू 7 कार से सफर करते हैं। उनके काफिले में साथ-साथ ऐसी ही दो डमी कारें चलती हैं, जिससे कि हमलावर को भ्रमित किया जा सके।
पीएम के काफिले में एक जैमर से लैस गाड़ी तैनात रहती है। जिसमें दो एंटीना लगे रहते हैं। यह सड़क के दोनों तरफ 100 मीटर की दूरी पर रखे विस्फोटक को निष्क्रिय करने में सक्षम होते है। पीएम के साथ हमेशा एक एंबुलेंस साथ चलती है। जो किसी भी आपात स्थिति में उन्हें मेडिकल सुविधा मुहैया करवाने के मकसद से साथ चलती है। जब कभी पीएम पैदल चलते है तो उनके आगे-पीछे सादे कपड़ों में एनएसजी के कमांडो साथ चलते रहते हैं।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक पर नाराजगी जताई।
राष्ट्रपति से मुलाकात की जानकारी खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर दी है। उन्होंने लिखा, 'आज राष्ट्रपति जी से मुलाकात की। उनकी चिंताओं और संवेदनाओं के लिए धन्यवाद। उनकी शुभकामनाओं के लिए आभारी हूं। वह हमेशा मेरे लिए संबल का स्रोत रहे हैं।'
इस बीच उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी पीएम नरेंद्र मोदी से बात की है। उन्होंने खुद ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी दी। उपराष्ट्रपति के अकाउंट से ट्वीट किया गया, 'उपराष्ट्रपति ने पीएम नरेंद्र मोदी से पंजाब में कल उनकी यात्रा के दौरान हुई सुरक्षा चूक को लेकर बात की। उन्होंने इस घटना को लेकर चिंता जताई। इसके साथ ही यह भी उम्मीद जताई कि कड़े कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की कोई घटना न हो सके।'
पीएम नरेंद्र मोदी बुधवार को पंजाब के फिरोजपुर में एक रैली में जाने वाले थे। इस रैली में वह 42,750 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का ऐलान करने जा रहे थे, लेकिन उनका एक काफिला फ्लाईओवर पर 20 मिनट तक फंसा रहा। यह घटना किसानों के एक संगठन की ओर से प्रदर्शन के चलते हुई। पीएम मोदी के काफिले के फंसने को सुरक्षा में गंभीर चूक का मामला माना गया और इसे लेकर भाजपा ने कांग्रेस की पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोला।
इससे पहले गुरुवार (06 जनवरी 2022) को लॉयर्स वाइस ने पीएम की सुरक्षा में चूक को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी। जिस पर शुक्रवार (07 जनवरी 2022) को सुनवाई होने वाली है। इसके अलावा पंजाब सरकार की ओर से सुरक्षा में चूक की जांच के लिए एक हाईलेवल कमिटी के गठन का भी फैसला लिया गया है।
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