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सोमवार, 25 अक्टूबर 2021

एन एन वोहरा कमेटी की रिपोर्ट केंद्र सरकार सार्वजनिक क्यों नहीं करती

 हरेश कुमार



एन एन वोहरा कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने से केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार अब तक क्यों बचती रही है. यह समझ से परे है. मुंबई बम विस्फोट कांड के बाद जस्टिस एन एन वोहरा के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया गया था, जिसने नेताओं और अपराधियों के बीच गठजोड़ को लेकर विस्तृत रिपोर्ट दी थी.

इस रिपोर्ट में नेचुरल करप्ट पार्टी के प्रमुख शरद पवार और दाऊद इब्राहिम के बीच संबंध से लेकर बाला ठाकरे तक का जिक्र है. 

यह रिपोर्ट सार्वजनिक होनी ही चाहिए.

देश का दुर्भाग्य है कि यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई. किस पर भरोसा करें अब तो हर भरोसे से भरोसा उठ चुका है. 2014 लोकसभा चुनाव से पूर्व महाराष्ट्र में सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री के कैंडिडेट नरेंद्र मोदी ने एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) को नेचुरल करप्ट पार्टी कहा था. यह बड़ी बात थी. एयर इंडिया को बर्बाद करने में शरद पवार और उनकी पार्टी के तत्कालीन एविएशन मंत्री प्रफुल्ल पटेल का बहुत बड़ा योगदान रहा है. सामान्य अपराधी दाऊद इब्राहिम को अंतरराष्ट्रीय अपराधी बनाने में भी शरद पवार एंड पार्टी का योगदान रहा है. इन सबके बावजूद आज तक शरद पवार बचा रहा है. दूसरा देश होता तो यह कब का लटका दिया गया होता, लेकिन देश का दुर्भाग्य यह है कि चुनाव बाद शरद पवार को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के दूसरे सबसे बड़े अवॉर्ड पद्म विभूषण से सम्मानित करने के साथ- साथ सर्वश्रेष्ठ सांसद का अवॉर्ड दिया. बस इसलिए कि महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना को बैलेंस करके रखा जा सके. 

आज वही शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार में है और महाराष्ट्र में अपराध अपने चरम पर है. 

महाराष्ट्र पुलिस के हथियार बंद जवानों के सामने कन्वर्टेड ईसाइयों ने दो निहत्थे हिंदू साधुओं और उनके ड्राइवर की पीट-पीट कर हत्या कर दी, लेकिन कहीं से कोई आवाज़ नहीं हुई.  

एक भी तथाकथित सेक्युलर बुद्धिजीवी और नेता ने इसके खिलाफ आवाज़ न उठाई. कुछ दिनों बाद मुंबई के बॉलीवुड में सुशांत सिंह राजपूत के एक्स मैनेजर दिशा सालियान के साथ एक पार्टी में रेप कर हत्या कर दी गई. इसे लेकर सुशांत सिंह ने आवाज़ उठाने की हिम्मत दिखाई तो उसे बुरी तरह से टॉर्चर कर मार दिया गया और इसे सुसाइड कहा गया. देर रात को पहले से ही बदनाम कूपर अस्पताल में पोस्टमॉर्टम की गई, जबकि देर रात पोस्टमॉर्टम नहीं किया जाता. बिसरा रिपोर्ट से जानबूझकर छेड़छाड़ की गई. यह सब पूरी सुनियोजित तरीके से की गई. सुशांत सिंह को लेकर शिवसेना नेता संजय राउत ने शिवसेना के मुखपत्र में उनके द्वारा बाइपोलर डिसऑर्डर बीमारी के बारे में सर्च करने से लेकर तमाम मनगढंत आरोप लगाकर यह साबित करने की कोशिश की कि सुशांत सिंह पारिवारिक कारणों से परेशान था, उसे फिल्म नहीं मिल रही थी. इस कारण उसने आत्महत्या कर ली. इसमें महाराष्ट्र पुलिस के तत्कालीन डीजीपी परमवीर सिंह सहित सत्ता के तमाम दलाल बढ़-चढ़कर भागीदारी कर रहे थे. इस मामले को उछालने के लिए अर्णब गोस्वामी के साथ मारपीट से लेकर मानसिक रूप से टॉर्चर किया गया, ताकि वह मुंह बंद रखे. इस पूरे प्रकरण में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पुत्र और मंत्री आदित्य ठाकरे का नाम जोर-शोर से उछला था. मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर उसे बेबी पेंगुइन नाम दिया गया. कहा गया कि बेबी पेंगुइन को बचाने के लिए महाराष्ट्र की सत्ताधारी सरकार और विभिन्न पार्टियों के गठबंधन ने एक-दूसरे को सहारा दिया. इस बात में काफी सच्चाई है.

कांग्रेस समर्थकों के हाथ पालघर संत हत्याकांड में शामिल हैं तो शिवसेना के नेता पुत्र का नाम दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत हत्या केस में.  एनसीपी के नेताओं के नाम दलाली और वसूली में.

इससे पहले जीतेजी सुशांत सिंह राजपूत बॉलीवुड के गैंग को समझने में पूरी तरह नाकाम रहे थे. इन्होंने पद्मावती फिल्म के देशव्यापी विरोध के समय एक बार अपने बयान में कहा था कि उन्हें राजपूत होने पर शर्म आ रही है. वही लोग इनकी हत्या पर मुंह में दही जमा लिये.

केंद्र सरकार की चुप्पी और किंकर्तव्यविमूढ़ कार्रवाई ने भाजपा के समर्थकों को बहुत ही ज्यादा मायूस कर दिया.

बॉलीवुड पर पूरी तरह से वामपंथी गिरोह का कब्जा हो चुका था, जो अब धीरे- धीरे ही सही छंटने लगा है. यहाँ दाऊद इब्राहिम एंड गैंग की मर्जी के खिलाफ कोई फिल्म नहीं बनती थी. हिंदुओं के तमाम देवी- देवताओं, पंडित- पुजारियों का मजाक उड़ाने वाला बॉलीवुड कभी भी किसी मुस्लिम को आतंकवादी नहीं दिखाया. कभी किसी नमाजी या मस्जिद पर उंगली न उठाई. यही इसकी सच्चाई रही है. मुल्ले पांच वक्त के नमाजी और वचन के पक्के हुआ करते थे. वहीं, मंदिर में रेप से लेकर तमाम घटनाओं को अंजाम दिया जाता था.

मुंबई बम विस्फोट की रेकी करने वाले पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकी डेविड हेडली की मेजबानी करने वाला फिल्म निर्माता- निर्देशक महेश भट्ट का लड़का राहुल भट्ट था, लेकिन उसका बाल भी बांका न हुआ. यही महेश भट्ट आगे चलकर मुंबई हमले के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की साजिश नाम से उर्दू लेखक अजीज बर्नी की किताब के विमोचन के समय कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह के साथ मंच पर था. सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के कारण किताब लेखक को माफी मांगनी पड़ी थी.

हरि अनंत, हरि कथा अनंता की तरह बॉलीवुड के वामपंथी गिरोह की कहानियाँ हैं. इस बॉलीवुड ने कभी भी कश्मीरी पंडितों की हत्या और कश्मीर से भगाए जाने, बहू-बेटियों के साथ सामूहिक बलात्कार पर मुंह न खोला था.


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